जानिए कि ग्राम प्रधान या सरपंच या मुखिया का वेतन (तनख्वाह) कितना होता है?

सबको जानना है जरूरी कि ग्राम प्रधान का वेतन (gram pradhan salary in up 2021) कितना होता है या मंथली सरपंच की सैलरी कितनी होती है ओर ग्राम प्रधान / सरपंच 5 साल मे कितना कमाते है?

आपको आज बताने वाला हूं कि जो आपका ग्रामीण क्षेत्र जो प्रधान होता है उसका मासिक वेतन कितना होता है। और ग्राम प्रधान को गांव के विकास के लिए कौन-कौन से भत्ते मिलते हैं, इसके बारे में दो तो मैं आपको विस्तृत जानकारी देने वाला हूं।

ग्राम प्रधान का वेतन

दोस्तों मैं आपको बता दूं कि ग्राम प्रधान का वेतन जो होता है। यह मानदेय के रूप में दिया जाता है। मानदेय की राशि हर स्टेट गवर्नमेंट की अलग-अलग है। ऐसा नहीं है कि जो तनख्वाह यूपी गवर्नमेंट देती है वही वेतन बिहार गवर्नमेंट भी राशि प्रदान करती हो।

ग्राम प्रधान का वेतन यूपी में

यूपी में प्रधान को मानदेय के रूप में 3500 रुपये से बढ़कर अब 5000 रुपये मिलते हैं हालांकि पहले 1000 रुपये था, फिर 2500 रुपये हुआ फिर 3500 रुपये हुआ अब 5000 रुपये है। इसके अलावा उसे कुछ भत्ते भी मिलते हैं जिसमें एक भत्ता होता है वह  यातायात भत्ता।

ग्राम प्रधान की सैलरी UP 2022

योगी सरकार ने प्रधानों का मानदेय 3,500 रुपये से बढ़कर 5,000 रुपये, क्षेत्र पंचायत प्रमुखों का मानदेय 9,800 रुपये से बढ़कर 11,300 रुपये तथा जिला पंचायत अध्यक्षों का मानदेय 14,000 रुपये से बढ़ाकर 15,500 रुपये किया।

ग्राम प्रधान की तनख्वाह = मासिक मानदेय + यातायात भत्ता

=₹5000/- + ₹15000/-
=₹20500/-रुपये

तो मुखिया (ग्राम प्रधान) का वेतन 20000 रुपये हुआ।

ग्राम प्रधान का वेतन : यातायात भत्ता के रूप में ग्राम प्रधान को यूपी में ₹15000 मिलता है। बिहार, राजस्थान गवर्मेंट और अदर स्टेट में इसके अलग-अलग हो सकते हैं।

आओ जानें कि ग्राम पंचायत चुनाव रिजल्ट (ग्राम प्रधान या क्षेत्र पंचायत या जिला पंचायत का) कैसे देखें…..

यातायात भत्ता ग्राम प्रधान को क्यों मिलता है?

यातायात भत्ता ग्राम प्रधान को इसके मिलता है क्योंकि ग्राम प्रधान को गांव के काम के लिए गांव के विकास के लिए बार-बार जनपद में जाना होता है या किसी ना किसी मीटिंग में जाना होता है। तो उस मीटिंग को अटेंड करने के लिए ग्राम प्रधान की जो राशि होती है इसके लिए सरकार प्रधान को एक भत्ता देती है।

सरपंच की सैलरी क्या होती है?

बहुत सारे लोग इस बात को जानने के लिए इच्छुक हैं कि आखिर सरपंच 5 साल में कितने रुपए कमाते हैं?

आपको जानकारी के लिए बता दें कि ग्राम प्रधान को सरपंच या मुखिया भी कहते हैं। मानदेय की जो राशि है ग्राम प्रधान की हर स्टेट का अलग अलग होती है।

बीडीसी सदस्य की वेतन कितनी होती है?

क्षेत्र पंचायत सदस्य का वेतन : बात करें कि मैं BDC की सैलरी की तो आप सोच सकते हैं कि जब ग्राम प्रधान का वेतन मात्र 2500 तक होता है। तो BDC का कितना मिलता होगा, बस फर्क इतना है कि ग्राम प्रधान को गांव में सारे काम करने का मौका मिल जाता है। और उसमें उनकी इनकम काफी बढ़ जाती है। और बीडीसी में काम ना के बराबर होता है। केवल ब्लाक प्रमुख के ऊपर निर्भर होता है कि वह आप को क्या दे सकते हैं।

बार बार पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1: ग्राम प्रधान का कार्यकाल कितना होता है?

Ans: 5 साल

Q2: ग्राम प्रधान का कार्यालय क्या है?

Ans: ग्राम प्रधान अपने घर को ही कार्यालय बना लेते हैं। इसके अलावा ग्राम प्रधान का कार्यालय ग्राम पंचायत में भी होता है।

Q3: ग्राम प्रधान के लिए योग्यता क्या है?

Ans: ग्राम प्रधान या सरपंच के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हर राज्य के लिए अलग अलग निर्धारित है।

Q4: ग्राम प्रधान बनने की आयु क्या है?

Ans: ग्राम पंचायत चुनाव लड़ने की उम्र 2020 में कम से कम 21 वर्ष होनी चाहिए।

Q5: ग्राम पंचायत चुनाव लड़ने के लिए जरूरी दस्तावेज क्या हैं?

Ans: 1- शपथ पत्र
2- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए जारी जाति प्रमाण
3– न्यूनतम आयु 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए
4- निर्वाचन क्षेत्र/ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में उसका नाम
5- इन सभी दस्तावेजों के अलावा चरित्र प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, पेनकार्ड, मूलनिवास तथा पुलिस सत्यापन आदि की आवश्यकता हो सकती है।

Q6: सरपंच बनने के लिए कितने बच्चे होने चाहिए?

Ans: राजस्थान में सरपंच बनने के लिए 2 बच्चे होने चाहिए जबकि अन्य राज्य में ऐसा नहीं है।

Updated: April 1, 2022 — 8:08 pm

The Author

Rima Singh

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम रीमा सिंह है और मैं jobalerthindi.com की कंटेंट राइटर हूँ। यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमे आपको महत्वपूर्ण शैक्षिक सामग्री, सभी विभाग की सरकारी नौकरी व इससे संबंधित अन्य प्रकार की जानकारी हिंदी में मिलेगी।

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  1. यूपी में ग्राम प्रधान के आरक्षण का फार्मूला क्या है।किस नियम के अनुसार आरक्षण तय किया जायेगा।

  2. : ग्राम पंचायत चुनाव लड़ने के लिए जरूरी दस्तावेज क्या हैं?

  3. Ans: 1- शपथ पत्र
    2- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए जारी जाति प्रमाण
    3– न्यूनतम आयु 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए
    4- निर्वाचन क्षेत्र/ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में उसका नाम
    5- इन सभी दस्तावेजों के अलावा चरित्र प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, पेनकार्ड, मूलनिवास तथा पुलिस सत्यापन आदि की आवश्यकता हो सकती है।

  4. सामाजिक विकास कल्याण समिति

    भारत में ग्राम सभा स्तर पर सामाजिक विकास कार्य की गुणवत्ता और कार्य पारदर्शिता की कमियों का उजागर किए जाने की व्यवस्था का सही प्रारूप का कोई विकल्प नहीं होने से गांवों में हमेशा शिकायत बनी रहती है। जबकि ग्राम सभा प्रधान भी जनप्रतिनिधियों की श्रेणी में है। लोकसभा विधानसभा में हमेशा विपक्ष की व्यवस्था को प्रभावी बनाया गया है लेकिन ग्रामसभा में विपक्ष का कोई स्थान नहीं है जिसके कारण प्रधान सहित ग्राम पंचायत में व्यापक स्तर पर हेराफेरी की व्यवस्था प्रभावी हुआ है।
    प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी ने पंचायत व्यवस्था में ग्राम सभा स्तर पर पंचायत भवन ग्राम सभा प्रधान कार्यालय होंगे तो ग्राम सभा स्तर पर शामुदायिक विकास केन्द्र जो स्वैच्छिक स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए होगा। केन्द्रीय शासनादेश पर भारत में सरकारी कोष से करोड़ों रुपए खर्च किए गए और निर्माण हुए। लेकिन प्रदेशों में संचालित शासन प्रशासन की स्थिलता के कारण बनाए गए शामुदायिक विकास केन्द्रों को स्वेच्छिक स्वयंसेवी संस्थाओं को सद्पयोग नहीं होने दिया और करोड़ों रुपए सरकारी कोष से खर्च किए गए निर्माणाधीन शामुदायिक विकास केन्द्रों के भवनों का देखरेख नहीं हुआ और बने हुए भवन खण्हर और क्षतिग्रस्त हो गए।शामुदायिक विकास केन्द्रों पर गांवों में बढती बेकारी बरोजगारी से निजात दिलाने के कार्य योजनाओं का संचालन स्वेच्छिक स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से किया जाना था। स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम युवतियों और महिलाओं और पुरुषों और युवाओं को दिए जाने सहित उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था को प्रभावी बनाया गया था। ग्राम सभा स्तर पर पंचायत में विपक्ष की भूमिका निभाने की भी जिम्मेदारी से जोड़ने सम्बंन्धी योजना को प्रभावी रूप दिया गया था
    ।। ऐसा होने पर बेरोजगारों का पलायन जो अन्य प्रांतों में महानगरों में बढकर सरकार के लिए चुनौती बनकर समस्या होती थी झुग्गी झोपड़ी,मलीन बस्तियों की बाढ और उनके पुर्नवास की बढती समस्याओं से निदान पाने की व्यवस्था को प्रभावी बनाया गया था। कुछ स्वार्थी शासकीय कूर्सी पर विराजमान शासकों की सोच से राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना को महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना नाम दिया गया और ग्राम विकास अभिकरण एक अलग संस्थान बनाया और मनरेगा योजना के अंतर्गत संचालित कार्य योजना ओं को संचालित करने की व्यवस्था को सुपूर्द करके शासकीय कूर्सी पर विराजमान शासकों और प्रशासकों को बाकायदा आयश्रोत पहुंचाने की व्यवस्था को प्रभावी बनाया गया।जो वर्तमान में बाकायदा संचालित है।यह देश में नागरिकों जो ग्रामीण क्षेत्रो में है उन्हें बेवकूफ बनाने की सोची समझी रणनीति और शाजिस बनाई गई है।यह सत्य स्वीकार किया जाना चाहिए।।

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